January 30, 2009

rat race

a samll ghazal by Nida Fazli Sahib

हर तरफ़ हर जगह बेशुमार आदमी
फिर भी तन्हाईयों का शिकार आदमी

सुबह से शाम तक बोझ ढोता हुआ
अपनी ही लाश का ख़ुद मजार आदमी

हर तरफ़ भागते दौड़ते रास्ते
हर तरफ़ आदमी का शिकार आदमी

रोज़ जीता हुआ रोज़ मरता हुआ
हर नए दिन नया इंतज़ार आदमी

ज़िन्दगी का मुकद्दर सफर दर सफर
आखिरी साँस तक बेकरार आदमी

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