September 21, 2009

Just a thought

When you are seating in the middle row of an assembly your "area of view" is reduced accordingly as you can not see behind your back but if you sit in the back you can have a full view. My observation:

Backbenchers have the widest view and perspective :)

what to say!!!!!!!!!!!

Movie: Hum Dono (1961)
Lyricist: Sahir Ludhianvi

कभी ख़ुद पे, कभी हालात पे रोना आया
बात निकली, तो हर इक बात पे रोना आया

हम तो समझे थे कि हम भूल गए हैं उनको
क्या हुआ आज, ये किस बात पे रोना आया

किस लिये जीते हैं हम किसके लिये जीते हैं
बारहा ऐसे सवालात पे रोना आया

कौन रोता है किसी और की ख़ातिर ऐ दोस्त
सबको अपनी ही किसी बात पे रोना आया

http://smriti.com/hindi-songs/kabhii-khud-pe-kabhii-haalaat-pe-ronaa-aayaa

ek khayal

महफिल में गर बैठे हो तो बनो महफिल की जीनत
रोने को तो यूँ ज़माने वाले और भी मौके देंगे

हितेश कुमार "अनायास"

chalo ik baar phir se ajnabi ban jaayen hum dono

Movie: Gumrah (1963)
Lyricist: Sahir Ludhiyanavi.....the guy is simply great


चलो इक बार फिर से, अजनबी बन जाएं हम दोनों
चलो इक बार फिर से ...

न मैं तुमसे कोई उम्मीद रखूँ दिलनवाज़ी की
न तुम मेरी तरफ़ देखो गलत अंदाज़ नज़रों से
न मेरे दिल की धड़कन लड़खड़ाये मेरी बातों से
न ज़ाहिर हो तुम्हारी कश्म-कश का राज़ नज़रों से
चलो इक बार फिर से ...

तुम्हें भी कोई उलझन रोकती है पेशकदमी से
मुझे भी लोग कहते हैं कि ये जलवे पराए हैं
मेरे हमराह भी रुसवाइयां हैं मेरे माझी की - २
तुम्हारे साथ भी गुज़री हुई रातों के साये हैं
चलो इक बार फिर से ...

तार्रुफ़ रोग हो जाये तो उसको भूलना बेहतर
ताल्लुक बोझ बन जाये तो उसको तोड़ना अच्छा
वो अफ़साना जिसे अंजाम तक लाना ना हो मुमकिन - २
उसे एक खूबसूरत मोड़ देकर छोड़ना अच्छा
चलो इक बार फिर से ...

http://smriti.com/hindi-songs/chalo-ik-baar-phir-se-ajanabii-ban-jaayen-ham-donon-utf8