October 7, 2009
Rahat Indori @Mushaira
http://www.youtube.com/watch?v=XroXS-k_XOw
शाखों से टूट जाएँ वो पत्ते नही हैं हम
आंधी से कोई कह दे की औकात में रहे|
कभी महक की तरह हम गुलो से उड़ते हैं
कभी धुए की तरह पर्वतो से उड़ते हैं
ये कैंचियाँ हमें उड़ने से खाख रोकेगी
की हम परो से नही हौसलों से उड़ते हैं
मरहबा सलाम क्या कहने हैं
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