October 4, 2009

nice nazm by Rahat Indori Sahib

कितनी पी कैसे कटी रात मुझे होश नही
रात के साथ गई बात मुझे होश नही

मुझको ये भी नही मालुम की जाना है कहाँ
थाम ले कोई हाथ मुझे होश नही

आंसुओ और शराबो में गुज़र है अब तो
मैंने कब देखी थी बरसात मुझे होश नही

जाने क्या टुटा है पैमाना या की दिल मेरा
बिखरे बिखरे हैं ख्यालात मुझे होश नही


the last couplet is just awesome

http://www.urdupoetry.com/rindori03.html

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