कितनी पी कैसे कटी रात मुझे होश नही
रात के साथ गई बात मुझे होश नही
मुझको ये भी नही मालुम की जाना है कहाँ
थाम ले कोई हाथ मुझे होश नही
आंसुओ और शराबो में गुज़र है अब तो
मैंने कब देखी थी बरसात मुझे होश नही
जाने क्या टुटा है पैमाना या की दिल मेरा
बिखरे बिखरे हैं ख्यालात मुझे होश नही
the last couplet is just awesome
http://www.urdupoetry.com/rindori03.html
October 4, 2009
nice nazm by Rahat Indori Sahib
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